अंबेडकर जयंती पर श्रद्धांजलि: समरस समाज और सामाजिक न्याय का दिया संदेश

विधानसभा अध्यक्ष, राज्यपाल और मंत्रियों ने किए कार्यक्रमों में सहभागिता; बाबा साहेब के विचारों को अपनाने का आह्वान

Apr 15, 2026 - 09:03
Apr 16, 2026 - 08:25
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अंबेडकर जयंती पर श्रद्धांजलि: समरस समाज और सामाजिक न्याय का दिया संदेश

अनन्य सोच। भारत रत्न B. R. Ambedkar की 135वीं जयंती पर प्रदेशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष Vasudev Devnani ने अजमेर स्थित अंबेडकर सर्किल पर बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

विधानसभा अध्यक्ष का संदेश: समरस समाज के निर्माण का आह्वान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए Vasudev Devnani ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। उनके विचार आज भी समाज को दिशा दे रहे हैं।

उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के आदर्शों को अपनाकर एक समरस, सशक्त और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान दें।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

वन राज्य मंत्री का संदेश: अंत्योदय के मार्ग पर बढ़ रहा देश

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री Sanjay Sharma ने भी अंबेडकर सर्किल पर बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने कहा कि B. R. Ambedkar द्वारा रचित संविधान देश के हर नागरिक को समानता, न्याय और अधिकारों की गारंटी देता है।

उन्होंने बताया कि Narendra Modi के नेतृत्व और मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma के मार्गदर्शन में देश और प्रदेश अंत्योदय, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

राज्यपाल का संदेश: राष्ट्र सर्वोपरि की सोच

राज्यपाल Haribhau Bagde ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था थे। उन्होंने देश को सामाजिक समरसता का मंत्र दिया और “राष्ट्र सर्वोपरि” की भावना को मजबूत किया।

उन्होंने कहा कि B. R. Ambedkar ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा अध्ययन और शोध में बिताया, जिसके परिणामस्वरूप भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संविधान मिला।

राज्यपाल ने बाबा साहेब के विचार—“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”—को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि उनका जीवन वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा।

समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और आमजन की बड़ी भागीदारी रही।

अंबेडकर जयंती के ये आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का माध्यम बने, बल्कि समाज में समानता, शिक्षा और न्याय के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश भी दे गए।